Posts

भगवान कबीर के चमत्कार

Image
 कबीर साहेब के चमत्कार                                            आज हम  आपको कबीर साहेब के चमत्कार के बारे में बताएंगे। कबीर साहेब लगभग आज से 600 साल पहले इस धरती पर आये और बहुत सी लीलाएं करके चले गए। कबीर साहेब की लीलाओं का जिक्र कबीर सागर में भी मिलता है। कबीर साहेब के 64 लाख शिष्य थे, यह आपने आप में एक बहुत बड़ी बात है। तो चलिए आज हम आपको कबीर साहेब के कुछ चमत्कार के बारे में बताते है।                                                     सिकंदर लोधी बादशाह का असाध्य जलन का रोग ठीक      करना-                                                शाम का समय हो गया था ।बीर सिंह को पता था की ...

कबीर परमेश्वर को 52 बार मारने का प्रयास किया गया

Image
हेलो दोस्तो मेरा नाम जसवंत सिंह आज आपको कुछ ऐसा बताने जा रहा हूं जिसको आप सुन कर अश्चकित हो जाओगे । आईये जानते हैं   कबीर परमेश्वर को 52 बार मारने का प्रयास किया गया शेखतकी द्वारा कबीर साहेब को गुंड़ों से मरवाने की  कुचेष्टा निष्फल -             कबीर साहेब के काशी आने के बाद शेखतकी ने सोचा कि यह कबीर तो किसी भी प्रकार नहीं मर रहा। वह कबीर साहेब को मारने के लिए रात्रा के समय कुछ गुंडों को साथ लेकर कबीर साहेब की झोपड़ी पर गया। कबीर साहेब सो रहे थे। शेखतकी ने गुंडों से कहा कि इसके टुकड़े-टुकड़े कर दो। गुंडों ने तलवार से पू                         कबीर साहेब जी के टुकड़े-टुकड़े कर दिए और अपनी तरफ से मरा हुआ जानकर चल पड़े। जब वे झोपड़ी से बाहर निकले तो पीछे से कबीर साहेब ने उठकर कहा कि पीर जी, दूध पीकर जाना। ऐसे थोड़े ही जाते हैं। शेखतकी व उसके गुंडों ने सोचा कि यह भूत है। वहाँ से भाग गये। उन गुंडों को तो बुखार हो गया। कई दिन तक बुखार नहीं उतरा। कबीर साहेब उनके पास गये और उनको ठी...

कबीर साहेब जी चारो युग में आते हैं

Image
कबीर साहेब का परिचय: -                                     विक्रम संवत 1455 (सं। 1398) ज्येशठ मास की पूर्णिमा सुबह-सुबह ब्रह्ममुहूर्त में वह पूर्णदेव कबीर (कविदेव) जी स्वयं अपने मूल स्थान सतलोक से आये कशी में लहर तरलेब के अंदर कमल के फूल पर एक लड़के का रूप धारण किए हुए हैं। कबीर साहेब जी चारो युग में आते हैं: - सतयुग में  सातसुक्रत कह तेरा, त्रेता नाम मुनिंद्र मेरा।  ड्वापर में करुणामय कहाया, कलयुग नाम कबीर धराया ।। सतगुरु पुरुष कबीर हैं, चारो युग प्रमाण। झूठे गुरुवा मर गए, हो गए भूत मसान ।। "सतयुग कविदेव (कबीर साहेब) सत सुकृत नाम से प्रकट हुए" पूर्ण प्रभु कबीर जी (कविदेव) सतना में सत सुकृत के नाम से स्वयं प्रकट हुए थे | उस समय गरुड़ जी, श्री ब्रह्मा जी, श्री विष्णु जी, और श्री शिव जी आदि को सत्य ज्ञान था श्री मुनि महर्षि जी को भी तत्वज्ञान समझाना चाहा था | लेकिन श्री मुनि जी ने भगवान के ज्ञान को सत ना जान कार ब्रह्मा जी से सुने वेद ज्ञान पर आधारित होकर और अपन...

खराब शिक्षा पद्धति

Image
खराब शिक्षा पद्धति                         भारत में जो शिक्षा पद्धति प्रचलित है, उसके कई पक्षों में सुधार की आवश्यकता है। हमारी शिक्षा व्यवस्था पर एक वृहत् जनसमूह को शिक्षित करने का दायित्व है। साधन और संसाधन बहुत सीमित हैं, परिस्थितियाँ भी अनुकूल नहीं हैं, फिर भी हम लक्ष्यों की प्राप्ति की ओर प्रयत्नशील हैं। फिर भी हम दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ें तो इस निराशाजनक स्थिति से उभर सकते हैं। अगर कुछ चुनौतियों की बात करें तो - 'सबके लिए शिक्षा' की सुविधा उपलब्ध करवाना                                                                     शिक्षित व्यक्ति से यह अपेक्षा की जानी चाहिए कि वह इस लक्ष्य प्राप्ति में सहयोग प्रदान करे। 'हर एक सिखाता है एक' का नारा इस दिशा में सफलता दिला सकता है। इसके लिए सरकारी तंत्र के साथ स्वयंसेवी और सामाजिक संगठनों को भी जोड़न...

Nostradamus prophecy

Image
क्या आपको 🤔 पता है भविष्यवाणी क्या होती है❓ये सच भी होता है या नहीं। आईए आज इसी बात पर चर्चा करते हैं भविष्यवाणी क्या होती है किसी मसीहा को जो संदेश मिलता है वो उन्हे दूसरों को दिखाता है। इसे ही पूर्वानुमान या 'प्रोफेसी' कहते हैं। ऐसे संदेशों के अन्तर्गत दैवी प्रेरणा, अर्थ समझाना, या आने वाली घटनाओ को पहले ही बता देना आदि आते हैं। इस प्रक्रिया में प्रोफेट की तरफ से भी दैवी स्रोत से कुछ पूछा या शंका प्रकटित की जाती है।  अब आपको हम ये भी बताते हैं की क्या ये सच भी होता है बताये विश्व विजयेता संत: - "(संत रामपाल जी महाराज की मुख में हिन्दुस्तान विश्व धर्मगुरु के रूप में प्रतिष्ठित होगा) "संत रामपाल जी के विषय में" नास्त्रेदमस की भविष्यवाणी "फ्रेंच (फ्रांस) देश के नास्त्रेदमस नामक प्रसिद्ध भविष्यवक्ता ने अनुमानित (इ.स.) 1555 में एक हजार श्लोकों में भविष्य की सांकेतिक शनि भविष्यवाणियों लिखी हैं। सौ - सौ श्लोकों के दस। शतक बनाए हुए हैं। वर्तमान से अब तक सभी सिद्ध हो चुके हैं। हिंदुस्तान में हो चुकी भविष्यवाणी : -  1. भारत की पहली महिला प्रधानमन...

संस्कारों का पतन

Image
संस्कारों का पतन 🙏😔...                                     वर्तमान में समाज सभ्यता की भाग दौड़ में अपने संस्कारों को पूर्ण रूप से भूल गया संस्कार ही भक्ति का श्रेष्ठ पाए हैं भक्ति के नियम आवश्यक है लेकिन बारी देशों की संस्कृति को देखकर भारतीय अपने पूर्वजों की दी हुई विरासत अपने संस्कारों को भूल चुका है प्रभु से अनजान है मनुष्य को यह वर्तमान में अहसास की नहीं हे की जीवन में खुदा का क्या महत्व है हम सभी को भक्ति करनी चाहिए यही हमारे जीवन का उद्देश्य हे मनुष्य को यह वर्तमान में अहसास की नहीं हे की जीवन में खुदा का क्या महत्व है हम सभी को भक्ति करनी चाहिए यही हमारे जीवन का उद्देश्य हेपरन्तु संस्कार के विनाश स्वरूप सब अस्त व्यस्त हो गया हे हम बाहरी सभ्यता को ग्रहण करने लग गए ना जाने क्यों बार बार भुल जाते हे की दुखो का अंत प्रभु। जैसे :-           विवाह के पश्चात् ससुराल में कुछ लड़कियाँ सर्व श्रृंगार करती हैं । सज - धजकर गलियों से गुजरती हैं । अजीबो - गरीब हरकत...

दहेज प्रथा

Image
दहेज प्रथा के कारण इंसान जब लालच की गहरी खाई में गोते लगाता है, तो वह इंसानियत को रौंदते हुए शैतान की भाषा बोलने लगता है। 'दहेज प्रथा' इसी का एक अप्रितम उदाहरण है। दहेज प्रथा का इतिहास तो काफी पुराना है लेकिन मौजूदा वक्त में यह एक नामक बिमारी का रूप ले चुका है। अब तक हमारे समाज में ना जाने कितने घरों को इसने बर्बाद कर दिया है। समाज के तमाम बुद्धिजीवी वर्ग आज दहेज प्रथा को बढ़ावा दे रहे हैं। भारत के किसी भी वर्ग के परिवार में आपको इसका विचार मिल जाएगा। खासतौर पर समृद्ध परिवारों में दहेज लेने की अधिक होड़ लगी रहती है। अब इसका प्रभाव गाँवों, शहरों और महानगरों में भी दिखने लगा है। लोग यह समझ ही नहीं पाते कि दहेज लेना और देना दोनों ही गुनाह है। भारतीय दंड संहिता भी अपराधी का सहयोग करने वाले को अपराधी मानती है। जब पाश्चत्य संस्कृति की बात आती है, तो हम अंग्रेज़ों को कोसते हुए कहते हैं कि उन्होंने हमारी सभ्यताओं को बिगाड़ दिया है लेकिन हम उनकी अच्छीईयों का ज़िक्र करना ही नहीं चाहते हैं। हम यह तो नहीं कहते हैं कि अंग्रेज़ क्यों नहीं दहेज लेते थे। एक पिता बहुत लाड़-...